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18 साल के किशोर ने खुद पैरवी कर जीता मुकदमा


0 प्रभावशाली पैरवी देख , मुरीद हुए सीजे
0 चीफ जस्टिस की डीबी ने दोनों याचिकाए मंजूर कीं
0 सभी एफआईआर और कार्रवाई निरस्त करने का आदेश
बिलासपुर * सिर्फ आईपी एड्रेस के आधार पर सायबर क्राइम में फंसाए गए एक किशोर ने हाईकोर्ट में पिटीशन लगाकर प्रभावशाली ढंग से खुद अपनी पैरवी की* प्रस्तुत कथनों और अभिलेखों में पेश सामग्री के आधार पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर निरस्त कर दोनों ही याचिकाएं मंजूर कर ली गईं * कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग होगा*
प्रतिवादी अभय सिंह राठौर ने पुलिस थाना तारबाहर, बिलासपुर में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मई-जून 2022 के दौरान, क्षितिज समेत  कई व्यक्तियों ने बैंक कर्मचारी जय दुबे के साथ मिलकर धोखाधड़ी से बैंक खाते खोले, महादेव सट्टा ऐप चलाने के उद्देश्य से एक जाली कंपनी बनाई* इस पर आईपीसी की धारा 420 और 34 तथा जुआ अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत अपराध दर्ज किए गए* याचिकाकर्ता का नाम बाद में सह-अभियुक्त क्षितिज भारद्वाज के कथन के आधार पर, बिना साक्ष्य के, प्रस्तुत किया गया* * एक अन्य प्रतिवादी डी. भास्कर राव ने भी पुलिस में एफआईआर कराई कि, एक अज्ञात व्यक्ति ने शिकायतकर्ता के भतीजे का रूप लेकर एक फर्जी इंस्टाग्राम आईडी  बनाई और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने धमकी भरे संदेश भेजे* जाँच के दौरान याचिकाकर्ता पीयूष गंगवानी( 18 वर्ष ) को केवल एक कथित आईपी एड्रेस के आधार पर फंसाया गया, जबकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं था* उसे थाने में जबरन कागज़ों पर हस्ताक्षर कराकर अदालत में पेश किया गया और एफआईआर की जानकारी दिए बिना ही हिरासत में भेज दिया गया*
जाली दस्तावेज़ों, जाली हस्ताक्षरों के आधार पर झूठा फंसाया
गंगवानी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में दो अलग अलग क्रिमिनल मिस्लेनियस पिटीशन दाखिल की *याचिकाकर्ता ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विभु दत्त गुरु की डीबी में खुद पैरवी करते हुए तर्क दिया कि पुलिस अधिकारियों और निजी प्रतिवादी डी. भास्कर राव की मिलीभगत से तैयार जाली दस्तावेज़ों, जाली हस्ताक्षरों और हेरफेर किए गए रिकॉर्ड के आधार पर उसे झूठा और दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया गया है
याचिकाकर्ता के डिवाइस का इस्तेमाल नहीं हुआ
.डीबी ने अपने आदेश में कहा कि, साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत प्रस्तुत साइबर सेल की रिपोर्ट यह स्थापित करती है कि, याचिकाकर्ता के डिवाइस का इस्तेमाल कथित फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट को संचालित करने के लिए नहीं किया गया *
प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण अभियोजन,
डीबी ने कहा कि, याचिकाकर्ता, राज्य के अधिवक्ता और प्रस्तुत प्रस्तुतियों और अभिलेखों में प्रस्तुत सामग्री पर विचार करने के बाद, न्यायालय का निष्कर्ष है कि याचिकाकर्ता पर प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण अभियोजन, कष्टदायक कार्यवाही और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है*सभी कार्रवाई और एफएआईआर  निरस्त की जाती हैं,*सह-अभियुक्तों के विरुद्ध कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी*, दोनों याचिकाएँ स्वीकार की जाती हैं*

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सचिव स्कूल शिक्षा  6 सप्ताह में बनाएंगे नई नीति 
0 शिक्षा के अधिकार मामले में सुनवाई
0 शासन के जवाब से हाईकोर्ट हुआ नाराज
बिलासपुर * शिक्षा के अधिकार मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सचिव स्कूल शिक्षा को निर्देश दिया है कि, 6 सप्ताह में प्री स्कूल से संबंधित नई नीति बनाकर अदालत में पेश करें * अगली सुनवाई दिसंबर माह में निर्धारित की गई है *
“ शिक्षा का अधिकार” मामले में दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पहले हुई सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव की अनुपस्थिति पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि. ‘हाईकोर्ट को मजाक में न लें।* चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सख्त लहजे में कहा था कि अगली सुनवाई में सचिव स्वयं उपस्थित होकर शपथपत्र के जरिए बताएं कि, गड़बड़ी करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है* योजना के पात्र हितग्राहियों की आखिर अनदेखी क्यों हो रही है* नियम शर्तों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है *
   पहले से ही सोचना चाहिए
आज चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की स्पेशल डीबी में सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि, शुरुआत से ही प्री स्कूल को मान्यता नहीं है * प्री प्रायमरी सारे निजी स्कूल बिना किसी मान्यता के ही चल रहे हैं कोई नियम नहीं बना है * याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षि सिंह ने इसका विरोध करते हुए बताया कि , 2013 से नया नियम बना हुआ है, इसे लागू नहीं किया जा रहा है* इस पर राज्य के अधिवक्ता ने कहा कि, हम इस पर एक नया ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही लागू हो जायेगा * इस बात पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि , आपको कितना समय लग रहा है * इन सब बातों पर शिक्षा विभाग को पहले से ही सोचना चाहिए * कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को आने वाले 6 सप्ताह में प्री स्कूल को लेते हुए नई नीति बनाने का निर्देश दिया है *
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला दिलाया
गौरतलब है कि, गत माह हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य शासन से यह भी पूछा था कि,गरीब बच्चों का हक मारकर आर्थिक रूप से सक्षम घरों के बच्चों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला दिलाया गया* ऐसी गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं* भिलाई निवासी राव की याचिका में आरोप लगाया गया है कि, फर्जीवाड़े के जरिए आरटीई के तहत गरीब बच्चों की सीटें कब्जाई जा रही है और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के बच्चों को दाखिला दिया गया है* निजी स्कूल भी आरटीई की सीटों को लेकर गंभीर नहीं है*

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