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हाईकोर्ट बार के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू

0 चुनाव अगले माह 27 को
0 17 को मतदाता सूची का प्रारम्भिक प्रकाशन

बिलासपुर * छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के वर्ष 2025-27 के निर्वाचन हेतु हेतु चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है * 27 नवम्बर को मतदान होने जा रहा है और 17 अक्टूबर को मतदाता सूची का प्रारम्भिक प्रकाशन किया जायेगा * दावा आपत्ति के बाद 30 अक्टूबर को अंतिम प्रकाशन किया जायेगा*
हाईकोर्ट बार एसोसियेशन के चुनाव अगले माह 27 तारीख को हो रहे हैं , इसके लिए आज मंगलवार से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है* आज से अधिवक्ताओं ने अपना बकाया शुल्क जमा करना शुरू कर दिया है *17 अक्टूबर को वोटर लिस्ट के शुरूआती  प्रकाशन के बाद 27 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक दावा आपत्ति कि जा सकेगी * इसके बाद 30 अक्टूबर को अंतिम प्रकाशन किया जायेगा *  31 अक्टूबर से 4 नवम्बर तक नामांकन पत्र वितरण और जमा करने का काम शुरू होगा* 7 नवम्बर नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि होगी 11 को नामंकन की जाँच और 12 को शाम 5 बजे तक उमीदवारों की पहली सूची प्रकाशित होगी जिस पर नाम 13 से 14 नवम्बर तक वापस लिए जा सकेंगे *उम्मीदवारों की अंतिम सूची 18 नवम्बर को आएगी* 27 को मतदान के बाद 28 नवम्बर को मतों की गिनती होगी * एक दिसम्बर को विजेताओं को प्रमाण पत्र दिए जायेंगे *
अगस्त का  शुल्क जमा करें
हाईकोर्ट बार एसोसियेशन के सचिव वरुणेद्र मिश्रा ने सभी अधिवक्ता सदस्यों को सूचित किया है कि, जिन अधिवक्तागणों का मासिक शुल्क माह अगस्त 2025 तक का जमा होगा उन्ही अधिवक्ताओं का मतदाता सूची में नाम प्रकाशित किया जावेगा* जिन लोगों ने शुल्क माह अगस्त 2025 तक का जमा नही किया है वह 16.अक्टूबर  तक गुरूवार प्रातः 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक शुल्क जमा करें, जिससे प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची में आपका नाम अंकित किया जा सके*
निर्वाचन, अपीलीय समिति तय
बार एसोसियेशन के सचिव वरुणेद्र मिश्रा ने बताया कि ,कार्यकारिणी ने एडवोकेट अनूप मजूमदार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी , बी एन नंदे व् शिशिर दीक्षित को सहायक निर्वाचन अधिकारी बनाया है *इसी तरह तीन सदस्यीय अपीलीय समिति बनाई गई है *

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अदालत की छवि धूमिल करते हैं ,अधिवक्ता के शब्द ; हाईकोर्ट
   0 नियमों और पेशेवर नैतिकता से भी बंधा हुआ है, अधिवक्ता
   0 एकलपीठ पर टिप्पणी करने पर, अधिवक्ता डीबी में तलब
बिलासपुर * हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश पर टिप्पणी करने वाले एक अधिवक्ता को अवमानना नोटिस जारी कर 18 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट तलब किया है * चीफ जस्टिस की डीबी ने अपने सामने प्रस्तुत हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है और विधिवत कार्रर्वाई करने का निश्चय किया है *
श्यामलाल मलिक बनाम ममता दास मामले में  जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की एकल पीठ द्वारा 3 जुलाई के आदेश में की गई टिप्पणी के आधार पर यह याचिका डीबी में पंजीकृत की गई* उक्त याचिका 3.जुलाई 2025 को एक विस्तृत आदेश द्वारा खारिज कर दी गई, हालाँकि, विद्वान एकल न्यायाधीश ने उक्त तिथि को एक और आदेश पारित किया 8 इसके अनुसार  सैमसन सैमुअल मसीह याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के रूप में , वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला, तथा प्रतिवादियों के अधिवक्ता वरुण वत्स की इस मामले में अंतिम दलीलें सुनीं गईं और आदेश का ‘ऑपरेटिव पैरा ‘ पारित कर मामला खारिज कर दिया* इस न्यायालय ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि, इससे पहले, पारिवारिक न्यायालय के अधिकार क्षेत्र की कमी का मुद्दा डब्ल्यू पी 227 संख्या 31/ 2024 में उठाया गया था और इसे दिनांक 8.अप्रैल .2024 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था *वह आदेश अंतिम बहस के दौरान इस न्यायालय के समक्ष रखा गया था* आदेश पारित होने के बाद, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, सैमसन मसीह ने खुली अदालत में कहा, “मुझे पता था कि मुझे इस पीठ से न्याय नहीं मिलेगा।” ~यह कथन अवमाननापूर्ण प्रतीत होता है* इसे उचित आदेश के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया गया*इसके अनुसार गत 10 जुलाई को, प्रशासनिक पक्ष से मामला चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उन्होंने रजिस्ट्री को नियमों के अनुसार अवमानना याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया * तदनुसार, यह याचिका इस न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध की गई *
अधिवक्ता के लिए अनुचित
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विभुदत्त गुरु की डीबी ने इस मामले में  सुनवाई करते हुए कहा कि, रिट याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट सैमसन सैमुअल मसीह ने वर्तमान न्यायाधीश के विरुद्ध खुली अदालत में अपमानजनक टिप्पणी की है, जो एक ऐसे अधिवक्ता के लिए अनुचित है, जो न केवल अपने मुवक्किल के प्रति उत्तरदायी है, बल्कि न्यायालय का एक अधिकारी होने के नाते, नियमों और पेशेवर नैतिकता से भी उतना ही बंधा हुआ है* अधिवक्ता द्वारा कहे गए शब्द अस्वीकार्य हैं और न्यायालय की छवि को धूमिल करते हैं* डीबी ने कहा कि ,यह न्यायालय इस बात से संतुष्ट है कि प्रतिवादी/कथित अवमाननाकर्ता सैमसन मसीह को एक नोटिस जारी किया जाए कि इस उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए उनके विरुद्ध अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए* डीबी ने रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से नोटिस जारी कर आगामी 18 जुलाई को सुनवाई में अवमाननाकर्ता को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है*

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