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पुरानी तारीखों के प्रकरणों में भी स्पेशल कोर्ट का क्षेत्राधिकार


      0  हाईकोर्ट ने खारिज किया बिलासपुर स्पेशल कोर्ट का आदेश
बिलासपुर* छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया है कि, जाली नोटों से संबंधित अपराधों का विचारण केवल विशेष न्यायालय (एनआईए)  द्वारा ही किया जाएगा, भले ही अपराध 2019 के संशोधन अधिनियम से पहले हुए हों*
यह प्रकरण जांजगीर-चांपा जिले का है, जहाँ आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 489-Aए  489-बी , 489-सी और 489-डी (जाली मुद्रा) के तहत मामला दर्ज किया गया था* प्रकरण में आरोपियों का पक्ष अधिवक्ता आशुतोष त्रिवेदी द्वारा रखा गया* विशेष न्यायालय बिलासपुर ने 17 सितंबर 2025 को एक आदेश पारित कर मामले को यह कहते हुए सत्र न्यायालय जांजगीर-चांपा वापस भेज दिया था कि, अपराध एनआईए संशोधन अधिनियम (24.जुलाई.2019) के लागू होने से पहले का है, इसलिए विशेष न्यायालय को इस पर सुनवाई का अधिकार नहीं है* इसी विसंगति पर सत्र न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय से राय मांगी थी*
निर्णय और मुख्य बिंदु
न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने अपने आदेश में स्पष्ट किया: कि आईपीसी की धारा 489-ए  से 489-ई तक के प्रावधान एनआईए अधिनियम, 2008 की स्थापना के समय से ही ‘अनुसूचित अपराध’ की श्रेणी में थे* 2019 के संशोधन ने केवल अनुसूची के क्रम में बदलाव किया था, क्षेत्राधिकार में नहीं*
विशेष न्यायालय का एकाधिकार:
एनआईए अधिनियम की धारा 22(1) और 22(4) के तहत, राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष न्यायालय को ही ऐसे मामलों की सुनवाई का अनन्य अधिकार है* न्यायालय ने निर्देश दिया कि चूंकि विशेष न्यायालय में 8 गवाहों के बयान पहले ही दर्ज हो चुके हैं, इसलिए सुनवाई वहीं से शुरू होगी जहाँ रुकी थी* नए सिरे से सुनवाई की आवश्यकता नहीं है*
अदालत का निष्कर्ष
उच्च न्यायालय ने विशेष न्यायालय बिलासपुर के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए मामले को पुनः उसी न्यायालय में बहाल करने का आदेश दिया है* अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई बिलासपुर स्थित विशेष अदालत में ही जारी रहेगी*

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