0 जब केंद्रीय विवि में हुआ साहित्यकारों का अपमान
0 कोटा विधायक समेत कईयों ने की चक्रवाल को हटाने की मांग
बिलासपुर * गुरु घासीदास केंद्रीय विवि में आयोजित एक राष्ट्रीय साहित्यिक परिसवांद में पहले एक साहित्यकार के अपमान से शुरू हुआ यह सिलसिला दूसरे कई लोगों तक जा पहुंचा * अचरज की बात रही कि ,उस जगह पर बैठे हुए अन्य प्रोफेसरों व स्थानीय प्रतिभागियों ने इसका कोई विरोध नहीं किया * घटना के विस्तारित होने के बाद आज कोटा विधायक समेत कई लोगों ने कुलपति को हटाने की आवाज बुलंद की है* विधायक अटल ने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है*
गुरु घासीदास केंद्रीय विवि में हुए आयोजन में कल जिस तरह कुलपति प्रो चक्रवाल ने आगंतुकों का अपमान किया उसका वीडियो भी बाद में तेजी से वायरल हुआ * एक साहित्यकार मनोज रूपडा को उन्होंने बाहर जाने को कह दिया * ऐसा करने से रोकने का आग्रह करने वाले प्रतिभागियों को भी उन्होंने ईनके साथ ही फ़ौरन बाहर चले जाने को कह दिया * इस वाकये को देखकर भी वहां मोजूद विवि के किसी भी प्रोफ़ेसर , अधिकारी या छात्र ने यह सब रोकने की हिम्मत नहीं की , सब हाथ बांधे चुपचाप बैठे रहे * आज सुबह से वीडियो वायरल होने के साथ ही कुलपति के खिलाफ लोग लामबंद होने लगे हैं *
अटल का पत्र राष्ट्रपति को
कार्यक्रम में साहित्यकारों के प्रति बरते गये कुलपति के बर्ताव पर नाराजगी जताते हुए कोटा विधयक अटल श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति से कुलपति प्रो. अलोक चक्रवाल को तत्काल प्रभाव से पद से हटाए जाने की मांग की है*उन्होंने इनके पूरे कार्यकाल की जॉच कराने का निवेदन भी किया है * अटल ने अपने पत्र में राष्ट्रीय परिसवांद कार्यक्रम के दौरान कुलपति के आचरण को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवैधानिक तथा विवि की गरिमा के प्रतिकूल बताया है *उन्होंने कहा इस घटना से न केवल विवि की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है, बल्कि देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों में भी गहरा रोष उत्पन्न हुआ है*
निरंतर विवादो में घिरे रहे
अटल ने पत्र में यह भी कहा कि, कुलपति के रूप में प्रो. आलोक चक्रवाल नियुक्ति के बाद से ही विवादो में घिरे रहे एन.एस.एस कैम्प विवाद में प्राध्यापको को प्रताड़ित करना, छात्र प्रतिनिधि मण्डल से नहीं मिलना, छात्र को बिना किसी कारण सीधे टी.सी दे देना* हॉस्टल में रहने वाले छात्रो की सुरक्षा का कोई मानदण्ड नहीं है विवि परिसर में ही छात्र की मृत्यु हो जाना जैसे कारनामे सुर्खियों में रहे*
प्रोफेसरों ने भी आवाज नहीं उठाई
न्यायधानी की सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट प्रियंका शुक्ला ने भी अपने वक्तव्य में कहा कि कुलपति आलोक चक्रवाल असभ्य इंसान है, और ऐसे इंसान को इतने बड़े पद पर बने रहने का कोई हक नहीं होना चाहिए* मुझे दुख ये है कि यहां के प्रोफेसरों ने भी मनोज रूपडा के साथ हुई इस घटना पर आवाज नहीं उठाई *कुछ समय पहले एक प्रोफेसर झा के साथ भी जब घटना हुई तब भी यहां के शिक्षक ऐसे ही खामोश थे *
क्षमा मांगे इस्तीफा दें और स्वयं चले जाएं
जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता अभय नारायण राय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि, विश्वविद्यालय द्वारा साहित्यिक गोष्ठी आयोजित कर देशभर के साहित्यकारों को बुलाना और स्वयं बुलाकर अतिथि का अपमान करना समझ से परे हैं* प्रोफेसर आलोक चक्रवाल द्वारा साहित्यकारों का अपमान बिलासपुर की धरती में हुआ जिसे बिलासपुर किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा क्षमा मांगे इस्तीफा दें और स्वयं चले जाएं अन्यथा बहुत जल्द उन्हें आंदोलन का सामना करना पड़ेगा *
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