0 भिलाई के पार्षद सलमान की याचिका खारिज
बिलासपुर*हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित वार्ड से निर्वाचित पार्षद को गलत जाति प्रमाणपत्र के आधार पर पद से हटाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है* कोर्ट ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित पार्षद का सोशल स्टेटस सर्टिफिकेट सक्षम अथॉरिटी ने जारी ही नहीं किया है और प्रमाणपत्र जारी करने वाली अथॉरिटी स्वयं उसे मानने से इनकार कर देती है, तो 2013 के एक्ट के तहत जाति जांच कमेटी से संपर्क करने की जरूरत नहीं है*
इस स्थिति में छत्तीसगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1956 की धारा 19(1)(ए-1) के तहत डिविजनल कमिश्नर पार्षद की कानूनी अयोग्यता तय कर सकते हैं* कोर्ट ने हटाए गए पार्षद मोहम्मद सलमान की याचिका खारिज कर दी* मामला भिलाई नगर निगम के वार्ड नंबर 35 शारदा पारा का है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था* चुनाव में मोहम्मद सलमान उर्फ इंजीनियर सलमान ने 2 दिसंबर 2021 को नामांकन दाखिल किया और खुद को कुंजड़ा जाति का बताते हुए ओबीसी वर्ग से होने का दावा किया* इसी वार्ड से चंदन यादव ने भी ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया* चुनाव परिणाम में मोहम्मद सलमान निर्वाचित हुए, जबकि चंदन यादव दूसरे स्थान पर रहे*
उपचुनाव में यादव निर्वाचित
चुनाव के बाद चंदन यादव ने सलमान के जाति प्रमाणपत्र को लेकर शिकायत की* जांच में प्रमाणपत्र अवैध पाए जाने पर सक्षम अधिकारी ने मोहम्मद सलमान को अयोग्य घोषित कर दिया और रिक्त पद को भरने के लिए उपचुनाव कराया गया, जिसमें चंदन यादव निर्वाचित हुए* इसके खिलाफ मोहम्मद सलमान और चंदन यादव ने अलग-अलग याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की थीं*
मूल दस्तावेज ही फर्जी
दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब मूल दस्तावेज यानी जाति प्रमाणपत्र ही फर्जी पाया गया है, तो कानून के तहत उसके परिणाम लागू होंगे* कोर्ट ने कहा कि रिक्त पद को भरने के लिए कराया गया उपचुनाव न केवल वैध था, बल्कि वार्ड में प्रतिनिधित्व की निरंतरता बनाए रखने के लिए कानूनी रूप से आवश्यक भी था* चंदन यादव का चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ और इसमें ऐसा कुछ नहीं है, जिसके आधार पर कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़े।*हाईकोर्ट ने मोहम्मद सलमान की चुनौती में कोई आधार नहीं पाते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी*
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