हलफनामा | Halafnama
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सचिव स्कूल शिक्षा  6 सप्ताह में बनाएंगे नई नीति 
0 शिक्षा के अधिकार मामले में सुनवाई
0 शासन के जवाब से हाईकोर्ट हुआ नाराज
बिलासपुर * शिक्षा के अधिकार मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सचिव स्कूल शिक्षा को निर्देश दिया है कि, 6 सप्ताह में प्री स्कूल से संबंधित नई नीति बनाकर अदालत में पेश करें * अगली सुनवाई दिसंबर माह में निर्धारित की गई है *
“ शिक्षा का अधिकार” मामले में दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पहले हुई सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव की अनुपस्थिति पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट चेतावनी दी थी कि. ‘हाईकोर्ट को मजाक में न लें।* चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सख्त लहजे में कहा था कि अगली सुनवाई में सचिव स्वयं उपस्थित होकर शपथपत्र के जरिए बताएं कि, गड़बड़ी करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है* योजना के पात्र हितग्राहियों की आखिर अनदेखी क्यों हो रही है* नियम शर्तों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है *
   पहले से ही सोचना चाहिए
आज चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की स्पेशल डीबी में सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कहा गया कि, शुरुआत से ही प्री स्कूल को मान्यता नहीं है * प्री प्रायमरी सारे निजी स्कूल बिना किसी मान्यता के ही चल रहे हैं कोई नियम नहीं बना है * याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता भगवंत राव के अधिवक्ता देवर्षि सिंह ने इसका विरोध करते हुए बताया कि , 2013 से नया नियम बना हुआ है, इसे लागू नहीं किया जा रहा है* इस पर राज्य के अधिवक्ता ने कहा कि, हम इस पर एक नया ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही लागू हो जायेगा * इस बात पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि , आपको कितना समय लग रहा है * इन सब बातों पर शिक्षा विभाग को पहले से ही सोचना चाहिए * कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को आने वाले 6 सप्ताह में प्री स्कूल को लेते हुए नई नीति बनाने का निर्देश दिया है *
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला दिलाया
गौरतलब है कि, गत माह हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य शासन से यह भी पूछा था कि,गरीब बच्चों का हक मारकर आर्थिक रूप से सक्षम घरों के बच्चों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला दिलाया गया* ऐसी गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं* भिलाई निवासी राव की याचिका में आरोप लगाया गया है कि, फर्जीवाड़े के जरिए आरटीई के तहत गरीब बच्चों की सीटें कब्जाई जा रही है और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के बच्चों को दाखिला दिया गया है* निजी स्कूल भी आरटीई की सीटों को लेकर गंभीर नहीं है*

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हाईकोर्ट बार के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू

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0 चुनाव अगले माह 27 को 0 17 को मतदाता सूची का प्रारम्भिक प्रकाशन बिलासपुर * छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के वर्ष 2025-27 के...
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रजनीश श्रीवास्तव हाईकोर्ट के  रजिस्ट्रार जनरल बने
बिलासपुर * रजनीश श्रीवास्तव को हाईकोर्ट का नया रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त किया गया है * इसके साथ ही उच्च न्यायिक सेवा के तीन सदस्य स्थानंतरित और पदस्थ किये गये हैं *
रजनीश श्रीवास्तव, उच्च न्यायिक सेवा के सदस्य और वर्तमान में प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, रायपुर के पद पर पदस्थ थे उन्हें हाईकोर्ट का नया रजिस्ट्रार जनरल  नियुक्त किया गया है * मनीष कुमार ठाकुर, जो वर्तमान में उच्च न्यायालय की स्थापना में  रजिस्ट्रार जनरल के पद पर पदस्थ थे उन्हें  उच्च न्यायालय की स्थापना में रजिस्ट्रार (सतर्कता) के पद पर नियुक्त किया गया है* इसी प्रकार मंसूर अहमद, जो उच्च न्यायालय स्थापना में रजिस्ट्रार (सतर्कता एवं सूचना एवं अधिकार) के पद पर कार्यरत, अब स्थापना में रजिस्ट्रार (सूचना एवं अधिकार) के पद पर नियुक्त किए गए हैं *

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18 साल के किशोर ने खुद पैरवी कर जीता मुकदमा

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0 प्रभावशाली पैरवी देख , मुरीद हुए सीजे 0 चीफ जस्टिस की डीबी ने दोनों याचिकाए मंजूर कीं 0 सभी एफआईआर और कार्रवाई निरस्त करने...
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सीबीआई स्पेशल कोर्ट की सजा रद्द

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0 पीएफ की राशि निकालने रिश्वतखोरी का था आरोप बिलासपुर* पीएफ की राशि निकालने के लिए रिश्वतखोरी के आरोप में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट द्वारा...
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अवमाननाकर्ता वकील को जारी नोटिस निरस्त

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*डीबी ने कार्रवाई की निरस्त बिलासपुर * एक मामले में सुनवाई के दौरान सिंगल बेंच पर टिपण्णी करने वाले वकील ने उसी बेंच में हाजिर...
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अदालत की छवि धूमिल करते हैं ,अधिवक्ता के शब्द ; हाईकोर्ट
   0 नियमों और पेशेवर नैतिकता से भी बंधा हुआ है, अधिवक्ता
   0 एकलपीठ पर टिप्पणी करने पर, अधिवक्ता डीबी में तलब
बिलासपुर * हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश पर टिप्पणी करने वाले एक अधिवक्ता को अवमानना नोटिस जारी कर 18 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट तलब किया है * चीफ जस्टिस की डीबी ने अपने सामने प्रस्तुत हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है और विधिवत कार्रर्वाई करने का निश्चय किया है *
श्यामलाल मलिक बनाम ममता दास मामले में  जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय की एकल पीठ द्वारा 3 जुलाई के आदेश में की गई टिप्पणी के आधार पर यह याचिका डीबी में पंजीकृत की गई* उक्त याचिका 3.जुलाई 2025 को एक विस्तृत आदेश द्वारा खारिज कर दी गई, हालाँकि, विद्वान एकल न्यायाधीश ने उक्त तिथि को एक और आदेश पारित किया 8 इसके अनुसार  सैमसन सैमुअल मसीह याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के रूप में , वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला, तथा प्रतिवादियों के अधिवक्ता वरुण वत्स की इस मामले में अंतिम दलीलें सुनीं गईं और आदेश का ‘ऑपरेटिव पैरा ‘ पारित कर मामला खारिज कर दिया* इस न्यायालय ने इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि, इससे पहले, पारिवारिक न्यायालय के अधिकार क्षेत्र की कमी का मुद्दा डब्ल्यू पी 227 संख्या 31/ 2024 में उठाया गया था और इसे दिनांक 8.अप्रैल .2024 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था *वह आदेश अंतिम बहस के दौरान इस न्यायालय के समक्ष रखा गया था* आदेश पारित होने के बाद, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता, सैमसन मसीह ने खुली अदालत में कहा, “मुझे पता था कि मुझे इस पीठ से न्याय नहीं मिलेगा।” ~यह कथन अवमाननापूर्ण प्रतीत होता है* इसे उचित आदेश के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया गया*इसके अनुसार गत 10 जुलाई को, प्रशासनिक पक्ष से मामला चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत किया गया और उन्होंने रजिस्ट्री को नियमों के अनुसार अवमानना याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया * तदनुसार, यह याचिका इस न्यायालय के समक्ष सूचीबद्ध की गई *
अधिवक्ता के लिए अनुचित
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विभुदत्त गुरु की डीबी ने इस मामले में  सुनवाई करते हुए कहा कि, रिट याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट सैमसन सैमुअल मसीह ने वर्तमान न्यायाधीश के विरुद्ध खुली अदालत में अपमानजनक टिप्पणी की है, जो एक ऐसे अधिवक्ता के लिए अनुचित है, जो न केवल अपने मुवक्किल के प्रति उत्तरदायी है, बल्कि न्यायालय का एक अधिकारी होने के नाते, नियमों और पेशेवर नैतिकता से भी उतना ही बंधा हुआ है* अधिवक्ता द्वारा कहे गए शब्द अस्वीकार्य हैं और न्यायालय की छवि को धूमिल करते हैं* डीबी ने कहा कि ,यह न्यायालय इस बात से संतुष्ट है कि प्रतिवादी/कथित अवमाननाकर्ता सैमसन मसीह को एक नोटिस जारी किया जाए कि इस उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए उनके विरुद्ध अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए* डीबी ने रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से नोटिस जारी कर आगामी 18 जुलाई को सुनवाई में अवमाननाकर्ता को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है*

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